मीसाबंदियों का सम्मान


सुरेश अग्रवाल
लोकतंत्र की रक्षा हेतु संघर्ष और त्याग की भावना का सम्मान

                      आपातकाल के दौरान मीसा कानून के तहत् अकारण जेलों में बंद किये गये प्रदेश के मीसाबंदियों को मध्यप्रदेश सरकार ने लोकनायक जयप्रकाश सम्मान निधि प्रदान कर लोकतंत्र की रक्षा हेतु संघर्ष और त्याग की भावना का सम्मान किया है। मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान का यह कदम प्रदेश ही नहीं बल्कि समूचे राष्ट्र में मील का पत्थर साबित होगा। तैंतीस वर्ष पूर्व जब अपनी कुर्सी बचाने की खातिर तात्कालीन सत्ताधीश द्वारा देश में लोकतंत्र का गला घोंटकर आपातकाल के रूप में तानाशाही कायम की और देश के सभी विरोधी नेताओं सहित लाखों निरअपराध कार्यकर्ताओं को (जिनमें सभी वर्ग और उम्र के लोग थे) जेलों में बंद कर दिया था। इस दौर में मीसा में बंद हुए अनेक मीसाबंदियों के परिवार उजड़ गए, अनेक आज इस दुनिया में नहीं हैं और उस समय जो किशोर अवस्था में कदम रख रहे थे आज वे बुढ़ापे की दहलीज पर अनेक समस्याओं से घिरे खड़ें हैं। परेशानियों के इस दौर में सरकार द्वारा दी जाने वाली सम्मान निधि निश्चित ही उनके अंधेरे जीवन में रोशनी लाएगी। इस बदले हुए परिवेश में उपेक्षाओं का दंश सह रहे सभी लोकतंत्र रक्षक सेनानी राजनैतिक और सामाजिक जीवन में श्रद्धा और सम्मान के पात्र बनेंगे और आने वाली पीढि़याँ भी उनसे प्रेरणा लेकर लोकतंत्र को मजबूती प्रदान करेंगी।
            तानाशाही को समाप्त कर देश में लोकतंत्र को पुर्नजीवित करने 1977 में देश की जनता ने अपने सबसे बड़े अस्त्र के प्रयोग से जो वेलेट क्रांति कर जनता सरकार गठित की तो बिना किसी खून खराबे के सत्ता परिवर्तन की यह अहिंसक मतपत्र क्रांति सारी दुनिया में एक उदाहरण बन गई। इस सत्ता परिवर्तन के बाद जरूर इन लोकतंत्र रक्षकों को उनके आर्थिक नुकसान की भरपाई करने के नाम पर कम ब्याज दर पर 25 हजार रूपयों का ऋण राहत स्वरूप प्रदान किया गया था, पर उसके बाद इन 30 वर्षों में उनकी भावनाओं, उनके संघर्ष और त्याग का कभी कोई मूल्यांकन नहीं हुआ। सत्ता आती जाती रही राजनेताओं का ध्यान सत्ता के शतरंजी खेल में लगा रहा। नींव के इन पत्थरों की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा पाया। उपेक्षित हो चले इन नींव के पत्थरों में एक बैचेनी थी। करेली के मीसाबंदियों में इन बदली हुई परिस्थितियों में चुपचाप बैठे रहकर अंधेरों के गर्त में गुम हो जाने की बजाय देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को तय करने दो वर्ष पूर्व 25-26 जून, 2006 का करेली में प्रांतीय मीसाबंदी सम्मेलन का आयोजन कर प्रदेश के मीसाबंदियों को एक दिशा दी। श्री कैलाश सोनी के संयोजकत्व में आयोजित इस सम्मेलन को चिंतन शिविर का नाम दिया गया तथा आमंत्रण पत्र में लिखा कि 'लोकतंत्र को मजबूत बनाने आपातकाल की 31वीं तिथि पर आयोजित दो दिवसीय चिंतन शिविर में आप सादर आमंत्रित हैं, आयोजन में हमारे और आपके विचारों के मंथन से जो अमृत निकलेगा वह लोकतंत्र को अमरता प्रदान करेगा। आमंत्रण पत्र में लिखी इन दो लाइनों में करेली के मीसाबंदियों की राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना का विराट दर्शन था।
                               इस दो दिवसीय सम्मेलन में प्रदेश के 25 जिलों से लगभग चार सौ मीसाबंदी आए थे और दो दिनों तक चले इस चिंतन शिविर में बदली हुई परिस्थिति में हमारा कर्तव्य क्या हो? इस विषय पर चिंतन हुआ। सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रदेश के वित्तमंत्री श्री राघव जी मीसाबंदियों की भावनाओं और विचारों से अभिभूत हुए और उन्होंने अपना भाषण इस बात को रेखांकित करते हुए कहा कि मेरे जीवन में यह पहला सम्मेलन है जिसमें कुछ मांगा नहीं जा रहा है बल्कि यहाँ कर्तव्य और दायित्व की चर्चा हो रही है समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित ऐसे मनीषियों के बारे में निश्चित ही हम विचार करेंगे ताकि आने वाली पीढि़याँ इनसे प्रेरणा लेती रहें और समाज में देश के प्रति त्याग और समर्पण की भावना बनी रह सके।
       करेली का सम्मेलन सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय की पृष्ठभूमि बना। इस सम्मेलन में प्रदेश के अन्य नेताओं में मध्यप्रदेश गौर संवर्धन बोर्ड के अध्यक्ष मेघराज जैन, लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघु ठाकुर, राज्य सभा सदस्य विक्रम वर्मा, स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई, पूर्व मंत्री जयश्री बैनर्जी, पूर्व केन्द्रीय मंत्री शरद यादव, मध्यप्रदेश वित्त आयोग की अध्यक्ष शीतला सहाय, छत्तीसगढ़ वित्त आयोग के अध्यक्ष वीरेन्द्र पाण्डे, पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण नायक, पूर्व मंत्री सविता बाजपेयी, पूर्व मंत्री रामपाल सिंह, सांसद सरताज सिंह सहित अनेक नेताओं ने आयोजन के उद्देश्य को सफलता प्रदान की।
                               इस सम्मेलन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि प्रदेश स्तर पर मीसाबंदियों का एक संगठन बन गया जिसे नाम दिया गया मध्यप्रदेश लोकतंत्र रक्षक संघ और इसके प्रांतीय अध्यक्ष का दायित्व सम्मेलन के संयोजक श्री कैलाश सोनी को दिया गया। विचार क्रांति की उर्वरा माटी में जन्में कैलाश सोनी अपने छात्र जीवन से ही सक्रिय रहे और गुजरात तथा बिहार में हुए छात्र आंदोलनों के पूर्व उन्होंने करेली में राष्ट्रीय स्तर के दो युवा सम्मेलन 1972-73 में आयोजित किये जिनमें देश के विभिन्न प्रांतों के विश्वविद्यालयों के छात्र नेता शामिल हुए थे।
                     लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में जब राष्ट्र की युवा शक्ति संगठित हुर्ह तो प्रदेश में गठित हुई छात्र युवा संघर्ष वाहिनी की अग्रणी कतार में कैलाश सोनी भी थे। आपातकाल में जिले में सबसे पहले गिरफ्तार और रिहाई में सबसे अंतिम मीसाबंदी कैलाश सोनी थे। जिन्हें जनता सरकार के आदेश से रिहा किया गया। उनकी गिरफ्तारी के दूसरे दिन करेली में आंदोलन हुआ और जुलूस निकला लोगों ने गिरफ्तारियाँ दीं। जिले में 75 गिरफ्तारी हुई थीं। जिनमें करेली नगर से ही 30 मीसाबंदी हैं।
                               मीसाबंदियों के इस नवगठित संगठन के अध्यक्ष की जिम्मेदारी ने कैलाश सोनी को एक बार फिर कुछ करने का अवसर दिया। जिसमें में सफल भी हुये। अपनी इस जिम्मेदारी को परिणाम तक पहुँचाने वे चुप नहीं बैठे। गत वर्ष फरवरी माह में भाजपा प्रदेश कार्यालय में उन्होंने प्रदेश के मीसाबंदियों का एक प्रतिनिधि सभा की बैठक बुलाई जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर विशेष रूप् से उपस्थित थे तब इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा था कि आपातकाल के अंधेरों से लड़ने वालों के जीवन में उजाला होगा पर कब होगा कैसे होगा यह बात लोगों की समझ के परे थी। प्रदेश के मीसाबंदी जो बदहाली का जीवन जीने मजबूर हैं, उनकी परिस्थितियों और भावनाओं का एहसास सभी को था। कैलाश सोनी ने जब इस संबंध में भाजपा नेता श्री लालकृष्ण आडवानी से जबलपुर हवाई अड्डे पर स्वास्थ्य मंत्री श्री अजय विश्नोई एवं पूर्व विधायक श्री उत्तमचंद लूनावत के साथ पहुँचकर भेंट की और मीसाबंदियों की स्थिति और भावनाओं से अवगत कराया तो इस पर श्री आडवाणी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को निर्देश दिये कि इस संबंध में जो संभव हो सके, करो।
                               आडवाणी जी के इस संकेत से निर्णय की राह सुलभ हो गई और प्रदेश में आज सतता के सबसे बड़े ओहदे पर बैठे और आपातकाल के दौरान मीसाबंदियों की कतार में पीछे खड़े और सबसे छोटे मीसाबंदी शिवराज सिंह चौहान ने निश्चित ही कमाल कर दिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने कार्यकाल में जो निर्णय ले रहे हैं और कदम उठा रहे हैं उनमें प्रदेश में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं छूटा जिसकी चिंता न की हो समाज के हर अंग का ध्यान रखा उनके सारे निर्णय जनता में सराहे जा रहे हैं। मीसाबंदियों के बारे में लिये गये निर्णय ने उन्हें इतिहास पुरूष बना दिया। इस निर्णय में पूर्व मुख्यमंत्री श्री सुन्दरलाल पटवा, पूर्व सांसद कैलाश सारंग, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर, वित्तमंत्री राघव जी स्वास्थ्य मंत्री अजय विश्नोई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिनके सहयोग से कैलाश सोनी अपने अभियान में सफलता पा प्रदेश के मीसाबंदियों को यथेष्टा सम्मान दिला सके।




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