आपातकाल


सुरेन्द्र अग्रवाल खंडवा (मीसाबंदी)

                               उपरोक्त विवादास्पद कानून 1971 मे भारत की संसद में पारित कानून था। (श्रीमति इन्दिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा पारित किया गया था) जिसमे व्यक्तियों की अनिश्चित कालीन निवारक बंदी (जेल में बन्द रखने) बिना वारंट खोज एवं संपत्ति की जप्ति, टेलीफोनिक वार्तालाप सुनने, रिकार्डिंग करने (वायरटेपिंग) के अधिकार शासन एवं पुलिस को दिये गए थे। भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियो को सुपर शक्तियों के उपयोग की छूट थी । बिना न्यायालयीन परीक्षण किसी भी नागरिक को बंदी बनाने, अनिश्चित कालीन अवधि तक जेल मे बन्द रखने की छूट इस कानून के तहत दी गई थी ।

                               पुलिस बर्बरता, अत्याचारों के विरुद्ध आवाज उठाने की अनुमति नहीं थी। नागरिक स्वतन्त्रता समाप्त कर न वकील, न दलील, न अपील ऐसे प्रावधान किए गए । इस मीसा कानून एवं डिफेंस इंडिया रूल (DIR )का भीषण दुरुपयोग आपातकाल के दौरान 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक राजनैतिक असंतोष का दमन करने के लिए किया गया । इस दौरान मीसा कानून में अनेक संशोधन राजनीतिक स्वार्थो को पूरा करने के लिए किए गए ।

(नोट ? उक्त कानून 1977 में मुरारजी देसाई के नेत्रत्व वाली जनता पार्टी सरकार द्वारा निरस्त कर दिया गया।)



(प्रस्तुति- नरेन्द्र अग्रवाल, प्रधान संपादक)




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